वर्तमान भारत की आवश्यकता सशक्त राष्ट्रवाद

 वर्तमान भारत की आवश्यकता सशक्त राष्ट्रवाद है। राष्ट्रवाद के माध्यम से ही हम भारत को विश्वगुरु, विश्व सिरमौर बनता देख सकते हैं, जैसे कि प्राचीन युगों में भारत विश्व गुरु रहा है । इतिहास के पन्नों ने यह युग हमसे छीना इसका प्रमुख कारण भारत में विदेशी आक्रमणकारियों और उनके द्वारा लाया गया संस्कृति है।यदि हम भारतीय संस्कृति का पालन करते हुए,राष्ट्रवाद की परिभाषा को समझते हुए, राष्ट्रहित में कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से हमें भारत विश्व गुरु बनता दिखता है ।राष्ट्रवाद का बिल्कुल यह अभिप्राय यह नहीं है कि देश  में निवास करने वाले विभिन्न जाति, धर्म, पंथ के लोगों को अपने परंपराओं को त्याग करना है ऐसा नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति के आधार पर अपने-अपने धार्मिक परंपराओं संस्कृतियों का पालन करना है क्योंकि भारतीय संस्कृति किसी भी जाति पंथ समुदाय के संस्कृति का नाश करना नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति वसुदेव कुटुंबकम के आदर्शों का पालन करती है। यह संस्कृति विश्व का पोषण कर सकती है। भारत में रहने वाले सभी जन समुदाय सिर्फ भारतीय है तो भारतीयता का विकास होगा,राष्ट्रवाद का विकास होगा। भारत में रहने वाले सभी जन, धरती संस्कृति एवं पूर्वज से एक हैं इसीलिए हम सब हिंदू हैं इसी मान्यता के आधार पर हमें अपने अपने पूजा पद्धतियों का स्वतंत्रता पूर्वक पालन करते हुए राष्ट्र- प्रथम के सिद्धांतों का पालन करेंगे तो निश्चित रूप से हम सब एक ही रहेंगे और भारत की अनेकता में एकता का सिद्धांत का पालन करते हुए और एकता के आधार पर भारत जो खंडित है वह अखंड होगा और भारत विश्व गुरु बनेगा।
भारत को अखंड करना, विश्व पटल पर सिरमौर की स्थिति पर देखना सभी भारतीयों का सपना होना चाहिए और इस महान स्वप्न को पूर्ण करने के लिए हम सब भारतीयों को आगे आना होगा, एक साथ आगे आना होगा ।सही नेतृत्व को पहचान कर सामने लाना होगा
आइए कदम से कदम मिलाकर भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए आगे बढ़े इसी विश्वास के साथ................................ जय हिंद जय भारत वंदे मातरम

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