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Showing posts from June, 2019

राम सबके

जग_मंगल_गुन_ग्राम_राम_के । दान_मुकुति_धन_धरम_धाम_के ।। #जय_श्री_राम" कहने मात्र से लोगो का कष्ट दूर हो जाता है। ***************************************** श्री रामजी का जीवन गुण जगत का कल्याण करने        वाला है ,मुक्ति,धन,धर्म और परम धाम देने वाला है। ***************************************** जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्रजी का जीवनगुण पता नही जिन्हें हिन्दुत्व ही पता नही है, वही धर्म को बदनाम कर  सकता है।चाहे वह हिन्दू या मुसलमान नाम से कोई भी हो। #अल्लाहु_अकबर के नारों से पाप ,आतंक फैलाने का काम चलाया ही जा रहा है और अब #जय_श्रीराम के नारों का भी दुरुपयोग करने की संभावना बढ़ रही है। सभी को सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि इससे #हिन्दूमुस्लिम को लड़ाने की नही #देश तोड़ने की साजिशें चल रही है। ahamadguruji

हिन्दु मस्जिद विरोधी नहीं

"हिन्दु मस्जिद विरोधी नहीं" * हिंदू समाज मस्जिद विरोधी नहीं*  जब जब अयोध्या का मामला आता है तो भारत ही नहीं अभी तो पूरे विश्व में हिंदू-मुस्लिम विवाद जैसा माहौल दिखाई देने लगता है। आपस में एक दूसरे को ना देखें ,आपस में क्रोध की भावना हो ऐसा पर्यावरण निर्मित कर दिया जाता है। जैसे आप सभी को पता ही होगा कि अयोध्या में लगभग 18 मस्जिदे हैं इन मस्जिदों के ऊपर कभी भी हिंदू समाज का ध्यानाकर्षण नहीं होता है क्योंकि हिंदू समाज को मस्जिद से नफरत ही नहीं है। अधिकांश हिंदू समाज के लोग मस्जिदों को रौनक करने में अपनी सहभागिता देते हैं। यदि हिंदू समाज पूरे भारत के कुल मस्जिदों मैं एक विवादित ढांचा  पर प्रश्नचिन्ह लगाता है तो उसके पीछे उनका आस्था का प्रश्न है, ऐसा आस्था है जो अपने आराध्य का है। एक ऐसा आराध्य जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा गया है। जिसके जीवन चरित्र का आत्मसात करने से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। बहुत ही दुख लगता है जब इमाम ए हिंद अर्थात श्री रामचंद्र जी के जन्म स्थान पर मुसलमान विवाद करते हैं। यह मुसलमान कुछ तथाकथित मुसलमान ही हैं। भारत के समस्त मुसलमानों का इन से...

पितादिवस विशेष

*पितादिवस विशेष * """ न तो धर्मचरणं किंचिदस्ति महतरम् ।   यथा पितृ शुश्रूषा तस्य वा वचनक्रिया ।।"" पिता की सेवा अथवा उनकी आज्ञा का पालन करने से बढ़कर कोई धर्म आचरण नहीं है। वाल्मीकि (रामायण, अयोध्या कांड) भारतीय संस्कृति के वाहक पुराण, वैदिक धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते हैं तो हमें पता चलता है की पिता शब्द स्वयं में एक देवता शब्द है। जिसकी महिमा कर पाना एक आम मनुष्य का काम नहीं हो सकता है। अपने पिता के द्वारा दिए गए अनुशासन और संस्कारों का जब हम पालन करते हैं तो स्वयं का जीवन स्वर्ग में बदल जाता है। हम स्वयं को श्रेष्ठ महसूस करते हैं, लेकिन आज की परिस्थितियां विपरीत होती जा रही है।  प्राचीन संस्कृति को हम भूलते जा रहे हैं दिखावा और आडंबर का जीवन जी रहे हैं। पिता को फूलों का बुके देकर, कुछ उपहार देकर केक काटकर हम अपना कर्तव्य पूर्ण समझते हैं जो कि हमारे भारतीय संस्कृति के अनुरूप सही नहीं है।  पुराणों में अनंत काल से ही पिता का महत्व का बखान किया जा चुका है पर हम फादर्स डे पर ही पिता के महत्व को समझ पा रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, यह हमारा दुर्भाग्य...