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Showing posts from March, 2019

देश हित में विचार करने वालों को अवसर.....!

आज पूरा देश चुनावी खेल में व्यस्त है। बहुत सारे जनमानस इस खेल का आनंद उठा रहे हैं। जैसा कि हम सभी जानते ही हैं कि किसी भी खेल में एक पक्ष की जीत और दूसरे पक्ष का हार होता है। जितने वाला शासन में रहकर अपने विचारों कर्तव्यों का निर्वहन करता है और हरने वाला अपने विचारों एवं कर्तव्यों निर्वहन के लिए विपक्ष की भुमिका में कार्य करता।  यदि उपरोक्त प्रक्रिया में शासन योग्य एवं  कुशल नेतृत्व के अधीन रहता है तो राष्ट्र के विकास व वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने हेतु कार्य करता है जबकि ठीक इसके विपरीत अकुशल स्वार्थी नेतृत्व प्राप्त होने पर राष्ट्र का विकास, मान-सम्मान व प्रतिष्ठा में प्रश्नवाचक लगता रहता है।विश्व में अपनी मातृभूमि का मान-सम्मान सर्वश्रेष्ठ स्थान लाए ऐसे  नेतृत्व को अवसर देना चाहिए। राष्ट्र के सम्मान से स्वयं का सम्मान, राष्ट्र के विकास से स्वयं का विकास स्वतः होता है। इसलिए प्रिय साथियों इस खेल में योग्य एवं कुशल खिलाड़ियों को अवसर देख कर स्वयं के हित के साथ-साथ राष्ट्रहित में कार्य करें।  धन्यवाद।

वर्तमान भारत की आवश्यकता सशक्त राष्ट्रवाद

 वर्तमान भारत की आवश्यकता सशक्त राष्ट्रवाद है। राष्ट्रवाद के माध्यम से ही हम भारत को विश्वगुरु, विश्व सिरमौर बनता देख सकते हैं, जैसे कि प्राचीन युगों में भारत विश्व गुरु रहा है । इतिहास के पन्नों ने यह युग हमसे छीना इसका प्रमुख कारण भारत में विदेशी आक्रमणकारियों और उनके द्वारा लाया गया संस्कृति है।यदि हम भारतीय संस्कृति का पालन करते हुए,राष्ट्रवाद की परिभाषा को समझते हुए, राष्ट्रहित में कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से हमें भारत विश्व गुरु बनता दिखता है ।राष्ट्रवाद का बिल्कुल यह अभिप्राय यह नहीं है कि देश  में निवास करने वाले विभिन्न जाति, धर्म, पंथ के लोगों को अपने परंपराओं को त्याग करना है ऐसा नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति के आधार पर अपने-अपने धार्मिक परंपराओं संस्कृतियों का पालन करना है क्योंकि भारतीय संस्कृति किसी भी जाति पंथ समुदाय के संस्कृति का नाश करना नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति वसुदेव कुटुंबकम के आदर्शों का पालन करती है। यह संस्कृति विश्व का पोषण कर सकती है। भारत में रहने वाले सभी जन समुदाय सिर्फ भारतीय है तो भारतीयता का विकास होगा,राष्ट्रवाद का विकास होगा। भारत में...

भारत भुमि-कर्म भुमि,अध्यात्म भुमि, मोक्ष भुमि