राष्ट्र रत्न वीर विनायक दामोदर सावरकर
मां भारती के वीर सपूत विनायक दामोदर सावरकर को महात्मा कहना भारतीय समाज के लिए न्याय व सम्मान होगा। जिनके महान विचारों के फलस्वरूप आज का हमारा राष्ट्रवाद टिका है। वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सेनानी, प्रखर राष्ट्रीयता के गुणों से ओतप्रोत व्यक्तित्व थे परंतु तत्कालीन और वर्तमान राजनीतिक स्वार्थों के कारण वीर सावरकर का अनादर किया गया और किया जा रहा है। यह वीर सावरकर के साथ-साथ मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण रखने वालों का भी अपमान है। वीर सावरकर अखंड भारत के समर्थक थे। वे मां भारती को गुलामी के जंजीरों से आजाद कराना चाहते थे। कट्टरपंथी मुगलों के वंशजों और अंग्रेजों के विरोधी थे और भारत को नुकसान पहुंचाने वाले सभी तत्वों और कारकों के विरोधी थे जो राष्ट्र की एकता अखंडता को कमजोर करता हो। कुछ लोग कहते हैं कि वे अंग्रेजों के सामने घुटने टेक दिए, यह सरासर गलत है, अनुचित है, निरर्थक है। मैं कहना चाहता हूं कि वह अंग्रेजों के और तत्कालीन स्वार्थी नेताओं के सबसे बड़ी समस्या थे। इसलिए कुछ लोगों ने साजिश कर उन्हें परेशान कराया गया। उनके विरुद्ध भ्रम फैलाकर उनकी लोकप्रियता को कम...